विषय: सुशासन की अवधारणा एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन
पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के जन्मदिवस के पावन अवसर पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका विषय था —
“सुशासन की अवधारणा एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन”।
यह संगोष्ठी दिनांक 25 सितम्बर 2023 (सोमवार) को
नागाजी सरस्वती विद्या मंदिर, भोजापुर, बैरिया (बलिया) में विचारपूर्ण एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई।
एकात्म मानववाद और सुशासन का विचार
संगोष्ठी में वक्ताओं ने पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद के सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका चिंतन आज भी सुशासन की नींव के रूप में अत्यंत प्रासंगिक है।
उन्होंने यह विचार रखा कि शासन व्यवस्था का केंद्र केवल सत्ता नहीं, बल्कि मानव कल्याण, नैतिकता और अंतिम व्यक्ति होना चाहिए।
विचार-विमर्श में उभरे प्रमुख बिंदु
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने निम्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की:
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सुशासन का अर्थ केवल प्रशासनिक दक्षता नहीं, बल्कि नैतिक शासन है
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पं. दीनदयाल उपाध्याय जी का चिंतन सामाजिक समरसता को मजबूत करता है
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अंत्योदय की अवधारणा आज की नीति-निर्माण प्रक्रिया के लिए मार्गदर्शक है
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शिक्षा संस्थानों की भूमिका राष्ट्रनिर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है
शिक्षकों, छात्रों और समाज की सक्रिय भागीदारी
इस संगोष्ठी में विद्यालय के आचार्यगण, विद्यार्थी, समाजसेवी एवं बुद्धिजीवियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। विद्यार्थियों ने भी अपने विचार प्रस्तुत कर पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के सिद्धांतों को समझने और अपनाने का संकल्प व्यक्त किया।
विचारों से प्रेरित भविष्य की दिशा
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि पं. दीनदयाल उपाध्याय जी का चिंतन केवल स्मरण का विषय नहीं, बल्कि आचरण में उतारने योग्य जीवन-दर्शन है।
उनके विचारों को अपनाकर ही एक सशक्त, नैतिक और समरस समाज का निर्माण संभव है।
विचार जो राष्ट्र को दिशा दें
पं. दीनदयाल उपाध्याय जी को शत्-शत् नमन




