ग्रामीण भारत, युवा और समय की समझ: निर्भय नारायण सिंह से संवाद

ग्रामीण भारत, युवा और समय की समझ: निर्भय नारायण सिंह से संवाद

लेखक: dnsmemorialtrust
तिथि: 25 सितंबर 2023


 

भोजपुरी लोक संस्कृति और संवाद की भूमिका

इस विशेष संवाद में स्वतंत्र मीडिया मंच “संकल्प बलिया” के माध्यम से आदरणीय श्री निर्भय नारायण सिंह (IRTS) ने भोजपुरी लोक संस्कृति की समृद्ध विरासत पर गहन विचार साझा किए। इस चर्चा का उद्देश्य लोगों को यह समझाना रहा कि भोजपुरी समाज की सांस्कृतिक जड़ें कितनी मजबूत और सशक्त हैं, तथा किस प्रकार इस विरासत को आत्मसात कर समाज को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। यह संवाद केवल संस्कृति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण जीवन, शिक्षा और युवा भविष्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को भी छूता है।


 

गांव से जुड़ाव और युवाओं के लिए मार्गदर्शन

अपने उच्च पद के बावजूद बार-बार गांव लौटने के पीछे की प्रेरणा बताते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग जीवन में आगे बढ़ते हैं, उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने अनुभव और संसाधनों से ग्रामीण युवाओं का मार्गदर्शन करें। उनका मानना है कि गांव के छात्रों और तथाकथित “सफल” लोगों के बीच अंतर असाधारण बुद्धिमत्ता का नहीं, बल्कि सोच और समय प्रबंधन का होता है। सही दिशा और अनुशासन से ग्रामीण युवा भी किसी से पीछे नहीं हैं।


 

ग्रामीण भारत की वर्तमान स्थिति

संवाद के दौरान उन्होंने “दो भारत” की अवधारणा पर भी चिंता व्यक्त की—एक शहरी और दूसरा ग्रामीण। गांवों का सामाजिक ताना-बाना धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है और बड़े पैमाने पर पलायन के कारण गांवों में या तो 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे रह गए हैं या 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कई युवा महानगरों में श्रमिक के रूप में काम कर रहे हैं, जहाँ न तो सामाजिक विकास होता है और न ही दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति। यदि वही परिश्रम गांव में किया जाए, तो बेहतर और सम्मानजनक अवसर सृजित हो सकते हैं।


 

करियर, प्रतिस्पर्धा और यथार्थ

उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में सरकारी नौकरियों की लोकप्रियता पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि यह मध्यम वर्ग की जोखिम से बचने वाली सोच का परिणाम है। साथ ही उन्होंने यह यथार्थ भी सामने रखा कि खेल, अभिनय या संगीत जैसे क्षेत्रों में शीर्ष पर पहुंचने की संभावना सांख्यिकीय रूप से कहीं अधिक कठिन होती है, क्योंकि अवसर अत्यंत सीमित हैं। इसलिए युवाओं को निर्णय लेते समय वास्तविकता को समझना आवश्यक है।


 

तकनीक, शिक्षा और डिजिटल भविष्य

तकनीक के उपयोग पर उन्होंने युवाओं को स्पष्ट संदेश दिया कि मोबाइल फोन को केवल मनोरंजन का साधन न बनाकर शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक उन्नति का उपकरण बनाया जाए। उन्होंने डिजिटल लाइब्रेरी की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भविष्य की लाइब्रेरी डिजिटल ही होगी, ताकि नई पीढ़ी तक ज्ञान सरल और सुलभ रूप में पहुँच सके।


 

समय, नैतिकता और जीवन दर्शन

अपने जीवन दर्शन को साझा करते हुए उन्होंने समय को “सच्चा समाजवाद” बताया, क्योंकि प्रधानमंत्री से लेकर सामान्य नागरिक तक सभी के पास समान 24 घंटे होते हैं। सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति अपने समय का उपयोग कैसे करता है। उन्होंने युवाओं को यह भी समझाया कि जीवन एक मैराथन है, सौ मीटर की दौड़ नहीं। शॉर्टकट और अनैतिक तरीकों से मिली सफलता टिकाऊ नहीं होती। निरंतरता, धैर्य और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ना ही स्थायी प्रगति का मार्ग है।


 

संबंधित यूट्यूब वीडियो

इस संवाद को संपूर्ण रूप में समझने के लिए संकल्प बलिया द्वारा लिया गया साक्षात्कार यूट्यूब पर उपलब्ध है, जहाँ इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई है।

 


 

आभार एवं संकल्प

Late Deena Nath Singh Memorial Trust इस सार्थक संवाद के लिए “संकल्प बलिया” एवं सभी दर्शकों का आभार व्यक्त करता है। ट्रस्ट यह संकल्प दोहराता है कि ऐसे विचारोत्तेजक संवादों के माध्यम से ग्रामीण भारत, युवाओं और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करने की दिशा में निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।

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