सीनियर रेल अधिकारी से संवाद: रोजगार, शिक्षा और बलिया के स्थायी विकास पर विचार

सीनियर रेल अधिकारी से संवाद: रोजगार, शिक्षा और बलिया के स्थायी विकास पर विचार

लेखक: dnsmemorialtrust
तिथि: 30 मई 2024


 

कार्यक्रम की पृष्ठभूमि

समाचार चैनल CNEWS BHARAT द्वारा आयोजित इस विशेष चर्चा में भारतीय रेल के वरिष्ठ अधिकारी एवं बलिया जनपद के मूल निवासी आदरणीय श्री निर्भय नारायण सिंह से सामाजिक-आर्थिक विषयों पर विस्तार से बातचीत की गई। यह संवाद ग्राम मुनी छपरा में वरिष्ठ ठेकेदार राम सिंह के आवास पर आयोजित हुआ, जहाँ स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ युवाओं के भविष्य और राष्ट्रीय दृष्टिकोण पर भी विचार रखे गए।


 

प्रशासनिक और व्यावसायिक परिचय

आदरणीय श्री निर्भय नारायण सिंह भारतीय रेल सेवा के 2000 बैच के अधिकारी हैं। वर्तमान में वे उत्तरी रेलवे, नई दिल्ली में मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (CCM) के पद पर कार्यरत हैं। उनका कार्यक्षेत्र वाराणसी से श्रीनगर तक फैला हुआ है। इस दायित्वपूर्ण भूमिका के साथ वे अपने गृह जनपद बलिया से निरंतर जुड़े रहते हैं।


 

बेरोज़गारी और जनसंख्या पर दृष्टिकोण

संवाद के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में बेरोज़गारी का मुख्य कारण तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या है। संसाधन सीमित हैं, जबकि रोजगार की मांग बहुत अधिक है। सरकार सभी को सरकारी नौकरी नहीं दे सकती, क्योंकि हर वर्ष सेवानिवृत्ति से जो सीमित पद खाली होते हैं, उनके लिए आवेदकों की संख्या कहीं अधिक होती है।
उन्होंने युवाओं को यह संदेश दिया कि वे केवल सरकारी नौकरी पर निर्भर न रहें, बल्कि निजी क्षेत्र और स्वरोज़गार की संभावनाओं को भी अपनाएँ।


 

युवाओं और शिक्षा के लिए मार्गदर्शन

युवाओं को निजी क्षेत्र में सफल होने के लिए उन्होंने कुछ आवश्यक योग्यताओं पर ज़ोर दिया—

  • तकनीकी प्रमाणपत्र या व्यावहारिक कौशल

  • अंकगणित, अंग्रेज़ी और कंप्यूटर का मजबूत ज्ञान

उन्होंने पुनः यह दोहराया कि 15 से 25 वर्ष की आयु पढ़ाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि इस अवधि में अनुशासन और समय प्रबंधन के साथ प्रतिदिन 7–8 घंटे अध्ययन किया जाए, तो कठिन से कठिन परीक्षा भी पास की जा सकती है।
वे स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में जाकर छात्रों को यह समझाते हैं कि डॉक्टर, इंजीनियर या अधिकारी कोई असाधारण प्रतिभा वाले लोग नहीं होते, बल्कि सही समय पर कठिन परिश्रम करने वाले साधारण व्यक्ति होते हैं।


 

बलिया की स्थानीय समस्याएँ और समाधान

बलिया की भौगोलिक स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि दो नदियों के बीच बसे होने के कारण बाढ़ यहाँ की स्थायी समस्या है। अस्थायी मरम्मत के बजाय उन्होंने आधुनिक तकनीक से आरसीसी तटबंध बनाने और नदी किनारों को रिवरफ्रंट के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया, जिससे बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने यह भी चिंता व्यक्त की कि रोजगार की तलाश में युवा शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, जिससे गांवों में केवल बुज़ुर्ग रह जा रहे हैं।


 

चुनाव, मतदान और राष्ट्रीय दृष्टि

चुनाव संबंधी प्रश्न पर उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे जाति, धर्म या दल से ऊपर उठकर “राष्ट्र प्रथम” की भावना से मतदान करें। उनके अनुसार डिजिटल युग में जनता सजग है और समझती है कि उसकी गरिमा और अधिकार कहाँ सुरक्षित हैं।


 

प्रशासनिक मुद्दों पर संतुलित मत

पेपर लीक और सरकारी भर्तियों में देरी जैसे विषयों पर उन्होंने कहा कि एक अधिकारी के रूप में वे नीति निर्माण नहीं, बल्कि उसका क्रियान्वयन करते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि न्यायपालिका का दायित्व है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष निर्णय देकर न्याय सुनिश्चित करे।


 

संबंधित यूट्यूब वीडियो

इस पूरी चर्चा को CNEWS BHARAT के यूट्यूब चैनल पर देखा जा सकता है।

 


 

समापन

Late Deena Nath Singh Memorial Trust इस संवाद को युवाओं, समाज और नीति-निर्माताओं के लिए प्रेरणास्रोत मानता है। यह बातचीत न केवल रोजगार और शिक्षा पर मार्गदर्शन देती है, बल्कि बलिया जैसे जनपदों के स्थायी और समग्र विकास के लिए एक स्पष्ट दिशा भी प्रस्तुत करती है।

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